डीयू में भारत-क्रोएशिया पूछताछ पर बातचीत में क्रोएशिया के प्रधानमंत्री ने किया खुलासा

क्रोएशिया विश्वविद्यालय में 1876 से संस्कृत में पढ़ाई जा रही है: आंद्रेज प्लेंकोविच 

                


डीयू में भारत-क्रोएशिया पूछताछ पर बातचीत में क्रोएशिया के प्रधानमंत्री ने किया खुलासा 

                   


दोनों देशों के वैज्ञानिक और सांस्कृतिक आयामों को नई दिशा आंद्रेज प्लेनकोविच का दौरा: प्रो. योगेश सिंह 

                     


नई दिल्ली, 20 फरवरी। 

क्रोएशिया गणराज्य के प्रधानमंत्री आंद्रेज प्लेनकोविच ने भारत-क्रोएशिया के राजदूत के साथ मिलकर कहा कि क्रोएशिया विश्वविद्यालय में 1876 से संस्कृत भाषा की पढ़ाई हो रही है। आंद्रेज प्लेनकोविच दिल्ली विश्वविद्यालय के वाइस रीगल लॉज के कन्वेंशन हॉल में "ब्रिजिंग कॉन्टिनेंट्स: क्रोएशिया एंड इंडिया इन ए कनेक्टेड वर्ल्ड" विषय पर विशेष व्याख्यान में मुख्यातिथि का जिक्र कर रहे थे। इस अवसर पर क्रोएशिया गणराज्य के भारत के राजदूत पीटर लुबिसिच विशिष्ट अतिथि उपस्थित रहे। कार्यक्रम की राजधानी दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रमुख प्रो. योगे सिंह ने की। इस दौरान डीयू साउथ सेंटर के निदेशक प्रो. रजनी अब्बी, स्केट डॉ. विकास गुप्ता, स्केटर्स इंटरनेशनल रिलेशन प्रो. नीरा अग्निमित्रा, क्रोएशिया के मंत्री और अन्य नागरिक, जिनमें दिल्ली विश्वविद्यालय के कई अधिकारी, कर्मचारी और छात्र भी शामिल हैं। 

                


व्याख्यान में क्रोएशियाई गणराज्य के प्रधानमंत्री आंद्रेज प्लेनकोविच ने भारत-क्रोएशिया सहयोग, वैश्विक सहयोग और विभिन्न अंतर्राष्ट्रीय परिदृश्यों पर विस्तृत प्रकाश डाला। दिल्ली विश्वविद्यालय के पितृ पक्ष प्रो. योगेश सिंह ने क्रोएशिया के राष्ट्रपति पद के लिए आयोजित कार्यक्रम में रिपब्लिक के प्रधानमंत्री सहित सभी का स्वागत किया। पैलबर्ट ने कहा कि प्रधानमंत्री आंद्रेज प्लेनकोविच भारत और दिल्ली विश्वविद्यालय का दौरा करते हुए देशों के शैक्षणिक और सांस्कृतिक जुड़ाव को नई दिशा देंगे। उन्होंने कहा कि यह पहली बार है जब क्रोएशिया का कोई प्रधानमंत्री भारत, यूक्रेन, दिल्ली विश्वविद्यालय में आया है। 

            


प्रधानमंत्री आंद्रेज प्लेनकोविच ने अपनी प्रार्थना में आगे कहा कि दिल्ली विश्वविद्यालय का प्रेरणा वातावरण अत्यंत समृद्ध और प्रेरणादायक है, जहां विविधता के बीच संवाद और सह-अस्तित्व की भावना स्पष्ट रूप से सामने आती है। यह विविधता ही ज्ञान को व्यापक दृष्टि प्रदान करती है और युवाओं को वैश्विक नागरिक बनने की क्षमता प्रदान करती है। उन्होंने ऐतिहासिक अभिलेखों का उल्लेख करते हुए कहा कि मार्को पोलो को याद किया गया और कहा गया कि पहले यात्रियों और विचारों के संयोजन-चिंतक ने ही एशिया और यूरोप को जोड़ा था, आज वही कार्य शिक्षा और ज्ञान कर रहे हैं। इसी सन्दर्भ में उन्होंने बताया कि 1876 में क्रोएशिया के ज़ाग्रेब विश्वविद्यालय में संस्कृत का अध्ययन-अध्यापन हो रहा था, जो भारत-क्रोएशिया के गंभीर सांस्कृतिक प्रभाव का प्रमाण है। उन्होंने महात्मा गांधी का उल्लेख करते हुए कहा कि अहिंसा, सत्य और मानवता की गरिमा के उनके विचार आज भी विश्व राजनीति और समाज के लिए मार्गदर्शक बने हैं।

                  


इस दौरान उन्होंने क्रोएशिया के बारे में और भी विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि 2020 में दो बड़े भूकंप आए और रूस-यूक्रेन युद्ध से उभरी आर्थिक कहानियां सामने आईं, फिर भी उनके देश ने रिज़ॉर्ट की स्थिति पर कब्ज़ा कर लिया और विकास की गति बना दी। आज क्रोएशिया में 22 प्रमुख पर्यटन स्थल विकसित किये गये हैं और वर्ष 2024 तक लगभग 2.3% वास्तविक दर दर्ज की गयी है। उन्होंने कहा कि भारत और क्रोएशिया के बीच शिक्षा, संस्कृति, पर्यटन और नवाचार के क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाएं हैं, और उद्योगों के बीच संवाद ही इसमें शामिल हैं। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच सहयोग अब केवल सांस्कृतिक स्तर तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रौद्योगिकी और नवाचार के क्षेत्र में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने विशेष रूप से टेक्नोलॉजी और डिजिटल भागीदारी का उल्लेख करते हुए कहा कि डिजिटल पब्लिक स्पीकर, अप सहायता और साइबर क्षमता जैसे क्षेत्र में भारत के अनुभव से क्रोएशिया सीखना चाहता है, जबकि यूरोपीय नवप्रवर्तन तंत्र भारत के युवाओं के लिए नया अवसर खोल सकता है।

              


आंद्रेज प्लेनकोविच ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की टिप्पणी करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में भारत और यूरोप के बीच संभावनाएं और सहयोग के नए आयाम खुले हैं। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच विशाल संवाद केवल आर्थिक और तकनीकी क्षेत्रों को लेकर नहीं है। डिजिटल तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के संदर्भ में उन्होंने भारत की प्रगति की वकालत करते हुए कहा कि भारत इस क्षेत्र में विश्व के अग्रणी देशों में उभर रहा है और क्रोएशिया इस यात्रा में एक मित्र और मित्र के रूप में आगे बढ़ना चाहता है। उन्होंने अपने डॉयलाग संवादों का उल्लेख करते हुए कहा कि नई दिल्ली में हुई चर्चाओं में दोनों देशों ने डिजिटल इनोवेशन, ट्रायल असिस्टेंस और फ्यूचर की तैयारी में मिलकर काम करने पर सहमति जताई है। उन्होंने ज़ाग्रेब विश्वविद्यालय में हिंदी अध्ययन विभाग के साथ अकादमी (एमओयू) की महत्वपूर्ण बात कही, जिससे छात्रों और शोधार्थियों के लिए जुड़ने-जुड़ने के अवसर बढ़ेंगे। साथ ही उन्होंने भारत-क्रोएशिया व्यापार साझेदारी के विस्तार और क्रोएशिया में आने वाले भारतीय फिल्मों की संख्या को दोनों देशों के मजबूत होते संबंधों का सकारात्मक संकेत बताया। अंत में उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्रों की रुचि और ऊर्जा के विशेषज्ञ ने कहा कि भारत विज्ञान, प्रौद्योगिकी और वैश्विक अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है और भारत-क्रोएशिया सहयोग विश्व के लिए सकारात्मक उदाहरण बन सकता है।

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