"अंतर्मन का प्रतिबिंब" में दिखेगा नौ रसों का संगम, सार्क राइटर्स फोरम उपेंद्र नाथ वर्मा को दी बधाई

 "अंतर्मन का प्रतिबिंब" में दिखेगा नौ रसों का संगम, सार्क राइटर्स फोरम  उपेंद्र नाथ वर्मा को दी बधाई 

दिल्ली: दिल्ली में सार्क राइटर्स फोरम द्वारा आयोजित साप्ताहिक गोष्ठी में प्रख्यात लेखकों की कृतियों पर गंभीर चर्चा हुई। इस विशेष साहित्यिक संगोष्ठी की अध्यक्षता दिल्ली विश्वविद्यालय हिंदी विभाग के प्रोफेसर सुनील वर्मा ने की। कार्यक्रम के दौरान फोरम के सदस्यों और अध्यक्ष प्रो. सुनील वर्मा ने वरिष्ठ लेखक उपेंद्र नाथ वर्मा को उनके अनूठे काव्य संकलन "अंतर्मन का प्रतिबिंब" के लिए विशेष रूप से बधाई व शुभकामनाएं दीं। स्याही ब्लू बुक्स, दिल्ली द्वारा प्रकाशित इस कृति की संवेदनशीलता की सभी उपस्थित विद्वानों ने सराहना की।गोष्ठी के मुख्य वक्ता अनिल कुमार जयंत ने पुस्तक की सराहना करते हुए कहा, "मन की भावनाएं असीमित होती हैं। उन असीमित भावनाओं को चुनकर शब्दों में संकलित करना मोती मंथन के समान एक बेहद कठिन और विशिष्ट कार्य है।" उन्होंने लेखक को इस सफल प्रयास के लिए बहुत-बहुत बधाई और शुभकामनाएं दीं।

                 


अपने अध्यक्षीय संबोधन में प्रो. सुनील वर्मा ने कहा कि यह किताब मनुष्य के मन की गहन भावनाओं, शास्त्रीय नौ रसों और विविध भाव भूमियों का एक जीवंत संकलन है। 94 कविताओं का यह अनूठा संग्रह पाठक को मानवीय अनुभूतियों के विभिन्न रंगों से रूबरू कराता है। गोष्ठी में वक्ताओं ने रेखांकित किया कि आधुनिक दौर में नौ रसों को इतनी सहजता के साथ कविताओं में पिरोना लेखक की परिपक्व सोच और उच्च साहित्यिक स्तर को दर्शाता है।

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