नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने एक बार फिर अपनी विदेश नीति से दुनिया को चौंका दिया है। उन्होंने जो शुरुआती विदेश नीति में एक तटस्थ देश के रूप में नेपाल के विकास पर जोर दिया है। हालांकि, बालेन शाह ने भारत और चीन के साथ भी परंपरागत संबंधों को मजबूत करने की बात कही है। बालेन शाह का मानना है कि नेपाल की विदेश नीति को अधिक वर्सेटाइल बनाने की जरूरत है, जिससे वह दुनिया के सामने खुद को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत कर सके। यही कारण है कि उन्होंने परंपरा के विपरीत काठमांडू स्थित राजदूतों और राजनयिक मिशनों के प्रमुखों को बुलाकर अपना पहला नीतिगत बयान दिया।
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बालेन शाह की यह ब्रीफिंग ऐसे समय हुई, जब पूरा राजनयिक समुदाय नेपाल की नई सराकर की प्राथमिकताओं के बारे बारे में संकेतों का बेसब्री से इंतजार कर रहा था। बालेन शाह ने भी किसी को निराश नहीं किया और एक संतुलित और व्यवहारिक विदेश नीति के प्रति नेपाल सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया। हालांकि, उन्होंने पूर्ववर्ती सरकारों की तरह ही भारत और चीन को लेकर जानबूझकर अस्पष्टता बनाए रखी। उन्होंने यह नहीं बताया कि नेपाल अपने इन दोनों पड़ोसी देशों के साथ संबंधों को कैसे संभालना चाहता है। हालांकि, भारत और चीन नेपाल की नई सरकार के कामकाज पर बारीकी से नजर बनाए हुए हैं।
