'भारत क्यों निशाने पर' पुस्तक का विमोचन, विद्वानों को मिला राहुल सांकृत्यायन सम्मान

'भारत क्यों निशाने पर' पुस्तक का विमोचन, विद्वानों को मिला राहुल सांकृत्यायन सम्मान

                 


कोलकाता/हावड़ा: वैचारिक विमर्श और साहित्य जगत के लिए 31 मई 2026 का दिन बेहद महत्वपूर्ण साबित हुआ, जब हावड़ा के रत्नाकर नॉर्थ पॉइंट स्कूल के सभागार में वसुधानंद पब्लिकेशन से प्रकाशित लेखक विप्लव विकास की बहुप्रतीक्षित शोध पुस्तक 'भारत क्यों निशाने पर' का भव्य विमोचन किया गया। सार्क जर्नलिस्ट फोरम, इंडिया चैप्टर के अध्यक्ष डॉ. सुधांशु अनिरुद्ध के कुशल मंच संचालन में आयोजित इस गरिमामयी समारोह की अध्यक्षता दिल्ली विश्वविद्यालय की प्रो. स्मिता मिश्र ने की। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में तिरुपति विश्वविद्यालय के प्रो. रामप्रकाश, सार्क जर्नलिस्ट फोरम नेपाल चैप्टर के अध्यक्ष रुद्र सुबेदी और वरिष्ठ पत्रकार एवं संपादक डॉ. आनंद पांडेय उपस्थित रहे। कार्यक्रम की शुरुआत में पुस्तक की भूमिका रखते हुए डॉ. आनंद पांडेय ने इसे वर्तमान भारतीय विमर्श में एक सशक्त हस्तक्षेप और समकालीन चुनौतियों को समझने के लिए हर वर्ग के लिए एक प्रामाणिक व पठनीय दस्तावेज बताया।

                  


 पुस्तक के विभिन्न ऐतिहासिक पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए प्रो. रामप्रकाश ने कहा कि भारत पर हुए आक्रमण केवल भूभाग जीतने के लिए नहीं, बल्कि इसकी वैचारिक और आध्यात्मिक रीढ़ को तोड़ने की सुनियोजित कोशिशें थीं, जिसे यह पुस्तक आज के संदर्भ में मजबूती से सामने लाती है। नेपाल से आए रुद्र सुबेदी ने सांस्कृतिक सुरक्षा पर जोर देते हुए कहा कि किसी भी राष्ट्र को समाप्त करने के लिए उसकी संस्कृति को मिटाना काफी है, और इस पुस्तक में भारत के खिलाफ चल रहे इसी सांस्कृतिक टकराव को तथ्यों के साथ रेखांकित किया गया है। 

              


अपने अध्यक्षीय भाषण में प्रो. स्मिता मिश्र ने इसे हर सजग नागरिक का अनिवार्य प्रश्न बताते हुए कहा कि यह पुस्तक हमें आत्मविस्मृति से बाहर निकालकर अपनी जड़ों पर गर्व करना सिखाती है। इस अवसर पर शिक्षा, शोध और साहित्य के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान हेतु प्रो. स्मिता मिश्र, प्रो. रामप्रकाश, डॉ. आनंद पांडेय, रुद्र सुबेदी और लेखक विप्लव विकास को प्रतिष्ठित 'पद्म भूषण पंडित राहुल सांकृत्यायन शिक्षा विरासत सम्मान-2026' से सम्मानित किया गया। अंत में, सार्क जर्नलिस्ट फोरम के विभिन्न देशों से आए पत्रकारों व प्राध्यापकों का आभार जताते हुए लेखक विप्लव विकास ने कहा कि हमारे पराक्रमी पूर्वजों द्वारा सौंपी गई बौद्धिक संपदा को समृद्ध करना और भारतीय दृष्टिकोण से विमर्श खड़ा करना आज की पीढ़ी का दायित्व है, और यह पुस्तक इसी दायित्व निर्वहन का एक ईमानदार प्रयास है। समारोह का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ।

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