देहरादून के थानो स्थित देश के पहले 'लेखक गाँव' में आगामी 25 अक्टूबर से 29 अक्टूबर तक पाँच दिवसीय भव्य 'अंतर्राष्ट्रीय साहित्य, कला एवं संस्कृति महोत्सव' का आयोजन

देहरादून के थानो स्थित देश के पहले 'लेखक गाँव' में आगामी 25 अक्टूबर से 29 अक्टूबर तक पाँच दिवसीय भव्य 'अंतर्राष्ट्रीय साहित्य, कला एवं संस्कृति महोत्सव' का आयोजन

नई दिल्ली: (संवाददाता) देहरादून के थानो स्थित देश के पहले 'लेखक गाँव' में आगामी 25 अक्टूबर से 29 अक्टूबर तक पाँच दिवसीय भव्य'अंतर्राष्ट्रीय साहित्य, कला एवं संस्कृति महोत्सव' का आयोजन होने जा रहा है। 'स्पर्श हिमालय फाउंडेशन' के तत्वावधान में आयोजित होने वाले इस महाकुंभ में भारत समेत दुनिया भर के प्रतिष्ठित साहित्यकार, लेखक, कवि, चिंतक और कलाकार जुटेंगे। हिमालय की तलहटी में बसे इस प्राकृतिक परिसर में वैश्विक स्तर पर भारतीय संस्कृति, लोक कला और साहित्य को बढ़ावा देने के उद्देश्य से यह ऐतिहासिक आयोजन किया जा रहा है। पाँच दिनों तक चलने वाले इस महोत्सव में समकालीन साहित्य, वैश्विक चुनौतियाँ, पर्यावरण संरक्षण और कला के भविष्य जैसे गंभीर विषयों पर देश-विदेश के प्रबुद्धजीवियों के बीच गहरा वैचारिक मंथन होगा, साथ ही अंतर्राष्ट्रीय स्तर के कवि सम्मेलनों और मुशायरों की महफिलें भी सजेंगी।

                    


इस महोत्सव की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें नई पीढ़ी, विशेषकर स्कूली बच्चों और युवाओं को अपनी प्रतिभा दिखाने के लिए एक अंतर्राष्ट्रीय मंच प्रदान किया जा रहा है। महोत्सव के दौरान हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में वाद-विवाद, भाषण और सृजनात्मक लेखन जैसी कई बौद्धिक प्रतियोगिताओं का आयोजन होगा। इसके साथ ही कला प्रेमियों के लिए ड्राइंग, पेंटिंग, फोटोग्राफी और पारंपरिक मिट्टी के बर्तन बनाने यानी पॉटरी की लाइव वर्कशॉप और प्रतियोगिताएं आकर्षण का मुख्य केंद्र रहेंगी। बच्चों को किताबों और कल्पनाओं की दुनिया से जोड़ने के लिए विशेष रूप से जादुई कहानी सत्र और दास्तानगोई के कार्यक्रम भी रखे गए हैं।
आयोजन समिति के अनुसार, इस भव्य महोत्सव में भाग लेने के लिए देश भर के विभिन्न प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों, विश्वविद्यालयों और कला अकादमियों को आमंत्रित किया गया है। महोत्सव में प्रतिभागी के रूप में शामिल होने के लिए स्कूलों, शिक्षकों, अभिभावकों और युवाओं के लिए पंजीकरण की प्रक्रिया तेजी से चल रही है। प्रकृति की सुरम्य वादियों में होने वाला यह आयोजन न केवल उत्तराखंड के पर्यटन और सांस्कृतिक गौरव को वैश्विक मानचित्र पर एक नई पहचान देगा, बल्कि कला और साहित्य के क्षेत्र में एक नया मील का पत्थर साबित होगा।

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