दिल्ली विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र प्रवीण कुमार ने जापान में रचा इतिहास, नए एशियन गेम्स रिकॉर्ड के साथ जीता स्वर्ण पदक

 दिल्ली विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र प्रवीण कुमार ने जापान में रचा इतिहास, नए एशियन गेम्स रिकॉर्ड के साथ जीता स्वर्ण पदक


नागोया, आइची, जापान 21 अक्टूबर 2026:दिल्ली विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र और 23 वर्षीय भारतीय पैरा एथलीट पद्मश्री प्रवीण कुमार ने जापान के आइची-नागोया में आयोजित एशियन पैरा गेम्स 2026 में पुरुषों की हाई जंप स्पर्धा में 2.05 मीटर की ऊँचाई पार कर नए एशियन गेम्स रिकॉर्ड के साथ स्वर्ण पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया।

               



प्रवीण कुमार ने टोक्यो पैरालंपिक 2020 में रजत पदक, पेरिस पैरालंपिक 2024 में स्वर्ण पदक और पिछले एशियन पैरा गेम्स में भी स्वर्ण पदक जीतकर अपनी असाधारण प्रतिभा का परिचय दिया है।महज 23 वर्ष की आयु में प्रवीण कुमार को उनकी उल्लेखनीय खेल उपलब्धियों के लिए अर्जुन पुरस्कार, मेजर ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार और पद्मश्री से सम्मानित किया जा चुका है।


दिल्ली विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र और वर्तमान प्रोफेसर कोच की गौरवशाली जोड़ी


प्रवीण कुमार की इस ऐतिहासिक सफलता के पीछे उनके कोच डॉ. सत्यपाल सिंह का महत्वपूर्ण योगदान है, जो वर्तमान में दिल्ली विश्वविद्यालय के आचार्य नरेंद्र देव कॉलेज में शारीरिक शिक्षा के सहायक प्रोफेसर एवं खेल निदेशक के रूप में कार्यरत हैं।डॉ. सत्यपाल सिंह को वर्ष 2012 में खेल प्रशिक्षण के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए प्रतिष्ठित द्रोणाचार्य पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। भारतीय पैरा खेलों के विकास और देश में पैरा स्पोर्ट्स को बढ़ावा देने में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए भारत सरकार ने वर्ष 2025 में उन्हें पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया।

यह भारतीय खेल जगत के लिए विशेष गौरव का विषय है कि प्रवीण कुमार और उनके कोच डॉ. सत्यपाल सिंह, दोनों ही पद्मश्री पुरस्कार विजेता हैं। प्रवीण कुमार अर्जुन पुरस्कार और मेजर ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार से भी सम्मानित हैं, जबकि उनके कोच डॉ. सत्यपाल सिंह द्रोणाचार्य पुरस्कार विजेता हैं।दिल्ली विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र प्रवीण कुमार और दिल्ली विश्वविद्यालय में वर्तमान में प्रोफेसर के रूप में कार्यरत उनके कोच डॉ. सत्यपाल सिंह की यह जोड़ी गुरु-शिष्य परंपरा, अनुशासन, कठिन परिश्रम और उत्कृष्ट खेल प्रशिक्षण की प्रेरणादायक मिसाल है। यह उपलब्धि दिल्ली विश्वविद्यालय के लिए भी गर्व का विषय है और दर्शाती है कि विश्वविद्यालय की शैक्षणिक एवं खेल संस्कृति अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट खिलाड़ी तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।प्रवीण कुमार की यह ऐतिहासिक उपलब्धि देश के युवाओं और पैरा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उनकी सफलता भारत में पैरा खेलों के उज्ज्वल भविष्य और खिलाड़ियों की असीम संभावनाओं को दर्शाती है।

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